महाकुंभ का अंतिम अमृत स्नान कब है?

Breking news  महाकुंभ का आयोजन 144 सालों में एक बार होता है। सनातन धर्म में महाकुंभ का विशेष महत्व है। जब प्रयागराज में 12 बार पूर्णकुंभ हो जाते हैं, तो उसे एक महाकुंभ का नाम दिया जाता है। महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी 2025 से हो गई है। 26 फरवरी (महाशिवरात्रि) को महाकुंभ का समापन होगा।

महाकुंभ के दौरान हर दिन स्नान का विशेष महत्व है, लेकिन अमृत स्नान का महत्व सबसे अधिक होता है। अमृत स्नान के दिन नागा बाबा और साधु-संत अपने शिष्यों के साथ भव्य जुलूस निकालते हुए संगम में गंगा स्नान करते हैं। 

महाकुंभ का पहला अमृत स्नान मकर संक्रांति 14 जनवरी को था। दूसरा अमृत स्नान मौनी अमावस्या पर 29 जनवरी को होगा। महाकुंभ का तीसरा और अंतिम अमृत स्नान 3 फरवरी को बसंत पंचमी पर होगा। इस साल पंचमी तिथि 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट से शुरू हो रही है जो 3 फरवरी को 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार बसंत पंचमी 3 फरवरी को मनाई जाएगी। जिस वजह से अमृत स्नान भी 3 फरवरी को ही होगा।

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