हिमालय की नदिया


हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदिया गंगा, सिंधु, ब्रम्हपुत्र 
नदी तन्त्र किसी नदी तथा उनकी सहायक नदियों को नदी तन्त्र कहते है।
सिंधु नदी तन्त्र इस नदी का उद्गम मानसरोवर झील के निकट तिब्बत में है।
यह नदी पश्चिम की ओर बहती हुई भारत में जम्मू कश्मीर जिले के लद्दाख में प्रवेश करती है।
इस क्षेत्र में बहुत सी सहायक नदिया है जैसे जांस्कर , नुबरा, श्योक तथा हुंजा इस नदी में मिलती है ।
सिंधु नदी बलूचिस्तान तथा गिलगिस्तान से बहते हुए अटक में पर्वतीय क्षेत्र से बाहर निकट है ।
सतलुज, ब्यास, रावी, चेनाब तथा झेलम आपस में मिलकर पाकिस्तान में मिठानकोट के पास सिंधु नदी में मिल जाती हैं।
इसके बाद यह नदी दक्षिण की तरफ बहती है तथा अंत में कराची से पूर्व की ओर अरब सागर में मिल जाती है
सिंधु द्रोणी का एकतिहाई से कुछ अधिक भाग भारत के जम्मू-कश्मीर, हिमाचल तथा पंजाब में तथा शेष भाग पाकिस्तान में स्थित है।
2,900 कि॰मी॰ लंबी सिंधु नदी विश्व की लंबी नदियों में से एक है।
गंगा नदी तन्त्र 
मुख्य धारा 'भागीरथी' गंगोत्री हिमानी से निकलती है
  अलकनंदा उत्तराखण्ड के देवप्रयाग में इससे मिलती हैं
 हरिद्वार के पास गंगा पर्वतीय भाग को छोड़कर मैदानी भाग में प्रवेश करती है।
गंगा की लंबाई 2.500 कि॰मी॰ से अधिक है।
हिमालय से न8कलने वाली नदिया जो गंगा में आकर मिलती है
यमुना, घाघरा, गंडक, तथा कोसी।
यमुना 
यमुना नदी हिमालय के यमुनोत्री हिमानी से निकलती है। 
यह गंगा के दाहिने किनारे के समानांतर बहती है तथा इलाहाबाद में गंगा में मिल जाती है।
सहायक नदिया 
चंबल, सिंध, केन, बेतवा, हिंडन 
घाघरा, गंडक तथा कोसी, नेपाल हिमालय से निकलती हैं।
इनके कारण प्रत्येक वर्ष उत्तरी मैदान के कुछ हिस्से में बाढ़ आती है, जिससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान होता है। 
प्रायद्वीपीय उच्चभूमि से आने वाली मुख्य सहायक नदियाँ चंबल, बेतवा तथा सोन हैं।
ये अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों से निकलती हैं।
इनकी लंबाई कम होती है तथा इनमें पानी की मात्रा भी कम होती है।
बाएँ तथा दाहिने किनारे की सहायक नदियों के जल से परिपूर्ण होकर गंगा पूर्व दिशा में, पश्चिम बंगाल के फरक्का तक बहती है।
 यह गंगा डेल्टा का सबसे उत्तरी बिंदु है। 
यहाँ नदी दो भागों में बँट जाती है, भागीरथी हुगली (जो इसकी एक वितरिका है), दक्षिण की तरफ बहती है तथा डेल्टा के मैदान से होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। मुख्य धारा दक्षिण की ओर बहती हुई बांग्लादेश में प्रवेश करती है एवं ब्रह्मपुत्र नदी इससे आकर मिल जाती है। अंतिम चरण में गंगा और ब्रह्मपुत्र समुद्र में विलीन होने से पहले मेघना के नाम से जानी जाती हैं। गंगा एवं ब्रह्मपुत्र के जल वाली यह वृहद् नदी बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। इन नदियों के द्वारा बनाए गए डेल्टा को सुंदरवन डेल्टा के नाम से जाना जाता है। 
ब्रह्मपुत्र नदी तन्त्र 
इसकी लंबाई सिंधु से कुछ अधिक है, परंतु इसका अधिकतर मार्ग भारत से बाहर स्थित है।
ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पूर्व तथा सिंधु एवं सतलुज के स्रोतों के काफी नजदीक से निकलती है।
यह हिमालय के समानांतर पूर्व की ओर बहती है।
दिबांग, लोहित, केनुला एवं दूसरी सहायक नदियाँ इससे मिलकर असम में ब्रह्मपुत्र का निर्माण करती हैं।
ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में सांगपो एवं बांग्लादेश में जमुना कहा जाता है।



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